नैनीताल: नैनीताल के माँ नयना देवी मंदिर से जुड़ा जूते पहनकर प्रवेश का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। ट्रस्ट ने कहा—मंदिर सभी श्रद्धालुओं के लिए खुला है, मामले की तथ्यात्मक जांच जरूरी।
Nainital Naina Devi Temple viral shoe video
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित माँ नयना देवी मंदिर से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल क्लिप में कथित तौर पर तीन मुस्लिम परिवार मंदिर परिसर से जूते पहने हुए बाहर आते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में यह भी दिखता है कि वे हनुमान मंदिर के बगल से निकल रहे हैं।
मंदिर में सामान्यतः जूते पहनकर प्रवेश निषिद्ध है और जूते रखने के लिए शू-स्टैंड व निगरानी के लिए कर्मचारी तैनात रहते हैं—ऐसे में नियम उल्लंघन का आरोप चर्चा का विषय बन गया है।
क्या है वीडियो में दावा
वायरल वीडियो में पैरों में जूते स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। मंदिर की व्यवस्था के अनुसार, श्रद्धालुओं को जूते परिसर के बाहर बने शू-स्टैंड में रखने होते हैं। आरोप है कि इस मामले में नियमों का पालन नहीं हुआ और निगरानी व्यवस्था के बावजूद यह चूक कैसे हुई—इस पर सवाल उठ रहे हैं।
वीडियो की सत्यता और समय को लेकर अनिश्चितता
यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो कब और किसने रिकॉर्ड किया। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। हालांकि, दृश्य सामग्री के आधार पर सोशल मीडिया पर बहस और प्रतिक्रियाएं तेज हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में तथ्यात्मक जांच जरूरी है, ताकि किसी समुदाय के प्रति अनावश्यक ध्रुवीकरण न हो।
प्रबंधन की कथित लापरवाही पर चर्चा
मंदिर परिसर में जूते प्रतिबंधित होने और कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद यदि ऐसा हुआ है, तो यह व्यवस्थागत चूक की ओर इशारा करता है। प्रशासनिक स्तर पर यह देखना होगा कि निगरानी, संकेतक (साइनएज) और प्रवेश नियंत्रण पर्याप्त हैं या नहीं।
मंदिर ट्रस्ट का पक्ष
वायरल वीडियो पर सवाल पूछे जाने पर माँ नयना देवी अमर उदय ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीव लोचन साह ने कहा कि यह वीडियो उनकी जानकारी में नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रस्ट की बैठकों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का कोई प्रस्ताव नहीं रहा है और मंदिर सभी श्रद्धालुओं के लिए खुला है।
उन्होंने किसी व्यक्ति या समुदाय के प्रवेश पर व्यक्तिगत आपत्ति को अनुचित बताया और कहा कि यदि नियम उल्लंघन हुआ है तो उसे प्रशासनिक तौर पर जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए।
कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द का सवाल
धार्मिक स्थलों पर नियमों का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए। किसी भी वायरल सामग्री के आधार पर निष्कर्ष निकालने से पहले जांच और सत्यापन जरूरी है, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे और तथ्य सामने आ सकें।



