देहरादून: उत्तराखंड में हाल ही में संपन्न हुई प्राथमिक शिक्षक भर्ती एक बार फिर विवादों में घिर गई है। 1670 पदों के लिए की गई इस भर्ती प्रक्रिया में कुछ अभ्यर्थियों ने गलत तरीके से नियुक्ति पाने का आरोप लगाया है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से डीएलएड (D.El.Ed) करने वाले अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए हैं, जबकि नियमों के अनुसार यह गंभीर अनियमितता मानी जा रही है।
1670 Teacher Posts in Uttarakhand Hit by Eligibility Dispute
भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों का कहना है कि मध्य प्रदेश में डीएलएड कोर्स करने के लिए स्थायी निवासी (डोमिसाइल) होना अनिवार्य है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि इन अभ्यर्थियों ने एमपी में डीएलएड के समय वहां का स्थायी निवासी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया, तो वे उत्तराखंड के निवासी के रूप में इस शिक्षक भर्ती में पात्र कैसे घोषित किए गए? यह स्थिति सीधे तौर पर दस्तावेजों की सत्यता और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।
यूपी डीएलएड को लेकर भी पहले उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब प्राथमिक शिक्षक भर्ती में डीएलएड योग्यता को लेकर विवाद सामने आया हो। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश से डीएलएड करने वाले कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर सवाल उठे थे। उस समय विभाग ने जांच के आदेश तो दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
निष्पक्ष जांच की मांग
अभ्यर्थियों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संगठनों का कहना है कि—यदि दस्तावेजों में दोहरी निवास स्थिति (डबल डोमिसाइल) का उपयोग किया गया है,या नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां की गई हैं, तो यह न केवल योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन है, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करता है। मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व अभ्यर्थियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।
शिक्षा विभाग की चुप्पी
फिलहाल इस पूरे मामले पर शिक्षा विभाग या भर्ती एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन बढ़ते आरोपों के बीच विभाग पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह नियमों की स्थिति स्पष्ट करे और यदि अनियमितता हुई है तो कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे।
उत्तराखंड की शिक्षक भर्ती पहले से ही युवाओं के लिए संवेदनशील मुद्दा रही है। ऐसे में डीएलएड योग्यता और डोमिसाइल को लेकर उठे ये सवाल यदि सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल चयनित अभ्यर्थियों बल्कि पूरी भर्ती प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करेंगे। अब निगाहें सरकार और शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।



