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चमोली: लोल्टी-मालबजवाण मोटर मार्ग 15 दिनों से बंद, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

थराली/विनोद पांडे- संवाददाता : चमोली जिले की थराली तहसील में स्थित लोल्टी-मालबजवाण मोटर मार्ग पिछले 15 दिनों से बंद है, जिससे स्थानीय लोगों, खासकर गर्भवती महिलाओं, बीमारों और बुजुर्गों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी यह सड़क भूस्खलन और मलबा आने के कारण अवरुद्ध है।

सड़क बंद होने का कारण और अधिकारियों की लापरवाही

यह सड़क हाल ही में ठेकेदार द्वारा बनाई गई थी, लेकिन बारिश के कारण मलबा और भूस्खलन होने से यह पूरी तरह से बंद हो गई है। हालात इतने खराब हैं कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। हमारे संवाददाता विनोद पांडे ने जब ठेकेदार से संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि जब तक प्रधानमंत्री सड़क योजना के क्षेत्रीय अधिशासी अभियंता मौके का मुआयना नहीं करेंगे, तब तक सड़क को खोला नहीं जा सकता।

आश्चर्य की बात यह है कि अधिशासी अभियंता 50 किलोमीटर दूर कर्णप्रयाग में बैठते हैं और उन्होंने अभी तक मौके पर आकर स्थिति का जायजा लेने की जहमत नहीं उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से आग्रह किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों के लिए जीवन बचाने की चुनौती

इस सड़क के बंद होने से लगभग 20 गांवों के लोग प्रभावित हैं। गर्भवती महिलाएं, बीमार, बुजुर्ग और दिव्यांग लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। क्षेत्र के अन्य पैदल रास्ते भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे आने-जाने के सारे विकल्प खत्म हो गए हैं।

खाद्यान्न संकट भी बना हुआ है

देवराड़ा गांव के ग्रामीण जून महीने से ही खाद्यान्न संकट का सामना कर रहे हैं। उन्हें पिछले तीन महीनों से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत राशन नहीं मिला है। ग्रामीण इसके लिए खाद्यान्न डीलर या थराली खाद्यान्न पूर्ति निरीक्षक को जिम्मेदार मान रहे हैं।

सरकार और प्रशासन से अपील

प्रभावित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उत्तराखंड सरकार से तत्काल इस मामले की जांच करने और दोषियों को निलंबित करने की मांग की है। उन्होंने जल्द से जल्द सड़क को खोलने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी करने की भी अपील की है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

अब यह देखना होगा कि क्या सरकार और प्रशासन इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हैं या फिर जनता को उनके हाल पर छोड़ देते हैं।

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