12.4 C
Dehradun
Monday, February 9, 2026
Google search engine
Homeउत्तराखंडउत्तरायणी कौथिक महोत्सव के समापन में पहुंचे CM धामी, सांस्कृतिक मंच से...

उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के समापन में पहुंचे CM धामी, सांस्कृतिक मंच से दिया बड़ा संदेश

देहरादून : परेड ग्राउंड में सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने लोक कलाकारों, साहित्यकारों, कला प्रेमियों और बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों का अभिवादन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव उत्तराखंड की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने सेवा संकल्प फाउंडेशन और इसकी संस्थापक गीता धामी सहित आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।
उन्होंने जागर, मांगल, छोलिया, पांडव नृत्य और झोड़ा-छपेली जैसे लोकनृत्यों व लोकगीतों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान हैं जिन्हें संरक्षित करना सामूहिक जिम्मेदारी है। महोत्सव में लगे स्टॉलों पर पारंपरिक हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद और स्थानीय व्यंजनों की प्रस्तुति की भी उन्होंने सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। लोक कलाकारों की आर्थिक सहायता, पेंशन योजना तथा गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से प्रशिक्षण जैसी योजनाएं इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य में ‘एक जनपद दो उत्पाद’ योजना और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को पहचान मिल रही है। नई पर्यटन नीति, होमस्टे योजना, स्टार्टअप प्रोत्साहन और स्वरोजगार योजनाओं से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने राज्य की विकास उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। किसानों की आय बढ़ाने, पर्यटन विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे क्षेत्रों में राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि लोक संस्कृति केवल परंपरा नहीं…बल्कि समाज की आत्मा है। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे। समारोह का समापन लोक प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ…जिसने दर्शकों को उत्तराखंड की लोक विरासत की समृद्ध झलक प्रदान की।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here





Most Popular