देहरादून। ग्राफिक एरा (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के ‘ग्राफिक एरा स्कूल ऑफ मैनेजमेंट’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक समापन हो गया। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य विषय “जीएसटी सुधार और उनका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: समावेशी आर्थिक विकास और डिजिटल उत्कृष्टता का निर्माण” रहा।
13 और 14 मार्च 2026 को चले इस मंथन में देशभर के नीति निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने शिरकत की। सम्मेलन की चर्चा मुख्य रूप से भारत के दीर्घकालिक विजन “विकसित भारत 2047” के इर्द-गिर्द केंद्रित रही।
कर सुधारों को बताया पारदर्शी और परिवर्तनकारी
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने जीएसटी को भारतीय कर व्यवस्था का एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी सुधार बताया। उन्होंने कहा कि जीएसटी ने न केवल कर प्रशासन को पारदर्शी बनाया है, बल्कि एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार को भी मजबूती प्रदान की है। इससे पहले, ग्राफिक एरा स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार पांडे ने अतिथियों का स्वागत करते हुए नीति-आधारित विमर्श के महत्व को रेखांकित किया।
देश के दिग्गज विशेषज्ञों ने रखे विचार
सम्मेलन के दौरान भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंता नागेश्वरन ने जीएसटी और वित्तीय शासन के बदलते स्वरूप पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किए। सत्र में श्री शिखर पंत, डॉ. रितेश जैन, डॉ. संकर्षण बसु, डॉ. हिरण्मय रॉय और डॉ. राजेन्द्र बैकाडी ने भी अपने विचार रखे।
12 तकनीकी सत्रों में शोध और नीति पर मंथन
दो दिवसीय आयोजन के दौरान कुल 12 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें मुख्य रूप से:
डिजिटल जीएसटी आर्किटेक्चर और उभरती कर प्रौद्योगिकियाँ।
एमएसएमई (MSME) क्षेत्र में आए बदलाव और प्रशासनिक चुनौतियाँ।
वित्तीय संघवाद और उपभोक्ता व्यवहार पर जीएसटी का प्रभाव।
सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित नीति पैनल चर्चा में फिक्की फ्लो उत्तराखंड की चेयरपर्सन डॉ. गीता खन्ना, प्रोफेसर अर्पिता मुखर्जी (ICRIER), और CNN News18 की स्मृति मिश्रा समेत कई विशेषज्ञों ने डिजिटल गवर्नेंस और समावेशी विकास पर चर्चा की।
समापन सत्र में मीडिया और नीति विशेषज्ञों की भागीदारी
समापन अवसर पर यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल कॉम्पैक्ट के जॉइंट सेक्रेटरी श्री अभिषेक रंजन, एनडीटीवी के सीनियर एडिटर श्री हिमांशु शेखर मिश्रा और द हिंदू बिजनेस लाइन के श्री शिशिर सिन्हा ने शिरकत की। वक्ताओं ने नीति निर्माण में अकादमिक संवाद की भूमिका पर जोर दिया।
सम्मेलन के संयोजक प्रोफेसर डॉ. विनय काण्डपाल ने पूरे कार्यक्रम का सार प्रस्तुत करते हुए इसे अकादमिक जगत और नीति निर्माताओं के बीच संवाद का एक सशक्त मंच बताया। अंत में डॉ. राकेश कुमार ने सभी आगंतुकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।