अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर आज पूरे उत्तराखंड में बंद का आह्वान किया गया है। विभिन्न संगठन पारदर्शी और न्यायिक निगरानी में जांच की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में जनाक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तराखंड आंदोलन और पर्वतीय मूल के विभिन्न सामाजिक एवं आंदोलनकारी संगठनों ने इस बहुचर्चित मामले में न्याय के लिए निर्णायक संघर्ष का एलान कर दिया है। वे केवल सीबीआई जांच से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज की निगरानी में कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई बिना किसी दबाव के सामने आ सके। इस मांग को उठाते हुए इन सभी संगठनों ने आज 11 जनवरी को पूरा उत्तराखंड बंद करने आह्वान किया है।
Uttarakhand Bandh Today Seeking Justice for Ankita Bhandari
संगठनों ने आंदोलन की रूपरेखा बताते हुए कहा कि 11 जनवरी को सुबह 10:30 बजे बूचड़ी फाटक ढंढेरा से एक विशाल रैली निकाली जाएगी। यह रैली चंद्रशेखर चौक, सिविल लाइंस तक पहुंचेगी। इसके बाद आंदोलनकारी बाजारों में जाकर बंद का आह्वान करेंगे। प्रेस वार्ता में हर्ष प्रकाश काला, कमला बमौला, राजेंद्र रावत, पूर्ण सिंह विष्ट सहित कई प्रमुख आंदोलनकारी नेता मौजूद रहे। बीते शनिवार देर शाम को भी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर शहर के विभिन्न इलाकों में मशाल जुलूस निकाले गए। शिव चौक, आदर्श शिवाजी नगर समेत कई क्षेत्रों में लोगों ने हाथों में मशाल लेकर सरकार से निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। इस दौरान “अंकिता को न्याय दो” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा।
पुलिस प्रशासन अलर्ट
उत्तराखंड बंद के मद्देनजर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। गढ़वाल रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राजीव स्वरूप ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में बाजारों और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ या अफवाह फैलाने वाली पोस्ट से बचने की अपील भी की गई है।
जबरन बंद कराने पर होगी सख्त कार्रवाई
एसएसपी अजय सिंह ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को जबरन बाजार बंद कराने या सार्वजनिक परिवहन रोकने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यदि कोई कानून हाथ में लेता है, तो उसके खिलाफ तत्काल और कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच की संस्तुति के बाद कई बड़े व्यापार मंडल, टैक्सी यूनियन और बस यूनियनों ने बंद को समर्थन न देने का निर्णय लिया है। इन संगठनों ने अपने प्रतिष्ठान और वाहन सामान्य रूप से चलाने का फैसला किया है तथा संभावित अव्यवस्था को देखते हुए पुलिस से सुरक्षा की मांग की है।
आम जनता से आंदोलन को समर्थन देने की अपील
संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि सीबीआई जांच तभी प्रभावी होगी जब उस पर किसी स्वतंत्र न्यायिक अधिकारी की निगरानी होगी। इसी मांग को लेकर आज उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया है। इसके साथ ही आम जनता से आंदोलन को समर्थन देने की अपील की गई है। रुड़की टॉकीज चौक स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में अशोक नगर क्षेत्रीय विकास समिति, चिह्नित आंदोलनकारी संघर्ष समिति, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी समिति, युवा मंच, उत्तराखंड एकता मंच और गढ़वाल सभा के पदाधिकारियों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। वक्ताओं ने कहा कि अब तक वीआईपी की पहचान और उनकी संख्या सार्वजनिक नहीं की गई। रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाने का आदेश किस स्तर से आया, यह स्पष्ट नहीं है। भाजपा के पूर्व विधायक और उनकी पत्नी द्वारा किए गए खुलासों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई। संगठनों का आरोप है कि सरकार इस पूरे मामले में केवल खानापूर्ति कर रही है और सच्चाई को सामने लाने से बच रही है।
न्याय की मांग बनी जनआंदोलन
अंकिता भंडारी हत्याकांड अब केवल एक कानूनी मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग का बड़ा जनआंदोलन बन चुका है। यदि जल्द सच्चाई सामने नहीं आई, तो संगठनों ने आंदोलन को और व्यापक रूप देने की चेतावनी दी है। आने वाले दिन उत्तराखंड की राजनीति और सामाजिक माहौल के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।



