देहरादून: भारत में लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp की नियति पर सुप्रीम कोर्ट 9 फरवरी को बड़ा फैसला सुनाने जा रहा है, जिसके बाद ऐप के भविष्य को लेकर काफी चर्चा तेज हो गई है। कोर्ट ने Meta और WhatsApp को कड़ी फटकार लगाई है और कहा है कि यूजर्स की निजता के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
दरअसल WhatsApp की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी पर विवाद कई देशी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चल रहा है। इस पॉलिसी के तहत कंपनी उपयोगकर्ताओं का डेटा Meta ग्रुप के अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा करती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह काफी जटिल और उपयोगकर्ताओं के लिए समझना मुश्किल है और “टेक इट या लीव इट” (मानो या ऐप छोड़ दो) वाला रुख सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने Meta और WhatsApp को कड़ी चेतावनी दी है कि भारत के नागरिकों के निजता के अधिकार के साथ समझौता नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा है कि वह न तो डेटा साझा करने की अनुमति देगी और न ही ऐसे नियमों को स्वीकार करेगी जो उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी के ‘शोषण’ जैसा प्रतीत होते हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा “You can’t play with the right to privacy of this country in the name of data sharing.” (आप डेटा साझा करने के नाम पर इस देश के निजता अधिकार के साथ नहीं खेल सकते।)
क्या हो सकता है WhatsApp बैन?
हालांकि WhatsApp के “बंद होने” की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही हैं, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से फिलहाल ऐप को बैन नहीं किया है। कोर्ट ने कंपनियों को 9 फरवरी तक अपना पक्ष और डेटा शेयरिंग के तरीके को स्पष्ट रूप से पेश करने को कहा है, और उसके बाद अंतरिम निर्देश या निर्णय दिया जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि संभव है ऐप को पूरी तरह से बंद नहीं किया जाए मगर डेटा शेयरिंग को नियंत्रित या प्रतिबंधित किया जा सकता है। पूरी पॉलिसी में संशोधन लाने के आदेश दिए जा सकते हैं। अदिलात्मक आदेश के बाद WhatsApp को भारत में अपनी सेवाओं में बड़े बदलाव करना पड़ सकते हैं।
टेक दिग्गज Meta पर बढ़ती चुनौती
यह मामला एक बुनियादी मुद्दे की ओर इशारा करता है — डेटा प्राइवेसी और उपभोक्ता की सहमति। पिछले साल Competition Commission of India (CCI) ने भी WhatsApp और Meta पर आरोप लगाया था कि उन्होंने “take it or leave it” पॉलिसी लागू की, जिसमें उपयोगकर्ताओं के पास असली विकल्प नहीं था।
उपयोगकर्ताओं के लिए क्या मायने रखता है?
भारत WhatsApp का सबसे बड़ा बाजार है, जिसमें करोड़ों लोग रोज उपयोग करते हैं। अगर कोर्ट डेटा साझा करने पर प्रतिबंध लगाती है, तो WhatsApp के कुछ फीचर्स जैसे बिजनेस चैटिंग, टारगेटेड विज्ञापन आदि प्रभावित हो सकते हैं। उपयोगकर्ताओं को अल्टरनेट ऐप्स जैसे Telegram, Signal आदि पर शिफ्ट होने की सोचनी पड़ सकती है। बिजनेस यूज़र्स के लिए डेटा प्राइवेसी और ऑपरेशन के नियम बदल सकते हैं।
Meta को देना होगा डेटा नीति पर स्पष्टीकरण
सुप्रीम कोर्ट ने मामला 9 फरवरी तक स्थगित किया है, इस दिन Meta/WhatsApp को डेटा नीति पर स्पष्टीकरण देना है। अदालत निर्णय के बाद आंकलन करेगी कि कंपनी भारत के मौजूदा नियमों के अनुरूप है या नहीं। हालांकि पूरी तरह WhatsApp के बंद होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कोर्ट का रुख बेहद कड़ा रहा है और यह फैसला भारतीय डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नियमों और उपयोगकर्ता डेटा सुरक्षा के लिहाज़ से ऐतिहासिक साबित हो सकता है।



