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उत्तराखंड: बाबा मोहन उत्तराखंडी के त्याग को भुली सरकारे, पुण्यतिथि पर उन्हें शत् शत् नमन

उत्तराखंड। गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने को लेकर अपने प्राणों को त्यागने वाले बाबा मोहन उत्तराखंडी कि आज पुण्यतिथि है आज ही के दिन 9 अगस्त को उन्होंने अपने प्राण त्यागे थे वही गौरतलब है कि राज्य की स्थाई राजधानी गैरसैंण बनाने और राज्य का नाम उत्तराखंड करने सहित पांच मांगों को लेकर 2 जुलाई 2004 से नैनीताल आदिबद्री में आमरण अनशन पर बैठे थे बाबा मोहन उत्तराखंडी।

38 दिन बाद बाबा मोहन उत्तराखंडी ने 9 अगस्त 2004 को कर्णप्रयाग के सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया था जहां गैरसैंण को राजधानी बनाने के नाम पर उन्होंने अपने प्राणों को त्याग दिया था और उत्तराखंड के इतिहास में अपना नाम अमर कर गए।

पौड़ी जनपद के ग्राम भटौली में मनोहर सिंह नेगी गए घर 1948 में जन्मे थे मोहन सिंह नेगी बचपन से ही जुनूनी तेवरों के लिए जाने जाते रहे वही इंटरमीडिएट और उसके बाद आईटीआई करने के पश्चात उन्होंने बंगाल इंजीनियरिंग में बतौर क्लर्क की नौकरी की वहीं वर्ष 1994 में उत्तराखंड आंदोलन के ऐतिहासिक इंदौर में बाबा ने सक्रियता से हिस्सेदारी ली थी वही कहा जाता रहा है कि 2 अक्टूबर 1994 से मुजफ्फरनगर कांड के बाद बाबा ने आजीवन दाढ़ी बाल ना कटाने की शपथ ली थी उसके बाद मोहन सिंह नेगी बाबा उत्तराखंडी के नाम से प्रसिद्ध हो गए थे।

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