Wednesday, February 28, 2024
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भाई का शव गोद में लेकर सड़क किनारे बैठा रहा मासूम, नहीं मिली Ambulance

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुरैना से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां एक आठ साल के मासूम को अपने भाई के शव को घंटो अपनी गोद में रखकर सड़क किनारे बैठने पर मजबूर होना पड़ा। मृतक बच्चे का पिता शव ले जाने के लिए जिला अस्पातल के बाहर एंबुलेंस या कोई और वाहन ढूंढ़ता रहा पर उसे कोई वाहन नहीं मिला, लेकिन उसकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आया।

हालांकि, बाद में पुलिस ने आनन-फानन में एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। मुरैना शहर के अस्पताल के बाहर की यह तस्वीर राज्य के स्वास्थ्य व्यवस्था की भी हालत बयान कर रही है।

मिली जानकारी के अनुसार मुरैना जिले के अंबाह के बड़फरा गांव निवासी पूजाराम जाटव अपने दो साल के बेटे (राजा) को इलाज के लिए मुरैना के जिला अस्पताल लेकर आए थे। एनीमिया और पेट में ज्यादा पानी भरने की वजह से राजा की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। राजा को जिस एंबुलेंस से लाया गया था वो अस्पताल पहुंचने के बाद ही लौट गई थी। ऐसे में राजा की मौत के बाद उसके पिता पूजाराम ने अस्पताल के डाक्टर व स्टाफ से शव को गांव ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध कराने की बात कही।

पूजाराम की आर्थिक स्थिति सही ना होने की वजह उन्हें उम्मीद थी कि अस्पताल की तरफ से कोई सरकारी एंबुलेंस उन्हें मिल जाएगा। लेकिन अस्पताल के स्टॉफ ने यह कहकर मना कर दिया कि शव ले जाने के लिए अस्पताल में कोई गाड़ी नहीं है। गाड़ी चाहिए तो अस्पताल के बाहर से किराये पर करना होगा।

पूजाराम का आरोप है कि अस्पताल परिसर में एंबुलेंस थी लेकिन जब उन्होंने उनसे शव लेकर चलने की बात कही तो उनसे डेढ़ हजार रुपये मांगे गए। अस्पताल से एंबुलेंस न मिल पाने की वजह से वह अपने बेटे के शव को लेकर अस्पताल के बाहर आ गए। उनके साथ में आठ साल का बेटा गुलशन भी था। अस्पताल के बाहर भी काफी मशक्कत के बाद भी उन्हें कोई गाड़ी नहीं मिली।

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इसके बाद दूसरे बेटे गुलशन को नेहरू पार्क के सामने, सड़क किनारे बने नाले के पास बैठाकर पूजाराम सस्ती रेट में वाहन तलाशने चले गए। करीब पौन घंटे तक आठ साल का गुलशन अपने दो साल के भाई के शव को गोद में लेकर बैठा रहा। सूचना मिलने पर कोतवाली टीआई योगेंद्र सिंह जादौन मौके पर पहुंचे। उन्होंने मासूम गुलशन की गोद से उसके भाई का शव उठवाया और दोनों को जिला अस्पताल ले गए। वहां गुलशन का पिता पूजाराम भी आ गया, उसके बाद एंबुलेंस की व्यवस्था की गई और शव को उसके घर भिजवाया गया। read more…

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