देहरादून। उत्तराखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के उद्देश्य से आयोजित होने वाले ‘भव्य रामलीला महोत्सव 2026’ का शुक्रवार को घंटाघर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर से भव्य कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून की ओर से आयोजित इस यात्रा में उत्तराखंड की विभिन्न लोक संस्कृतियों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, धार्मिक झांकियों और लोकनृत्यों का आकर्षक संगम देखने को मिला।
रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान में 11 से 21 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले इस महोत्सव में रामलीला मंचन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन संध्या, मेला और पारंपरिक पुतला दहन जैसे विशेष आकर्षण शामिल होंगे।

राम झांकी में 10 फीट ऊंचे हनुमान जी और 12 फीट ऊंचे जामवंत जी की प्रतिमाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। वानर सेना, जामवंत के प्रतिरूप, भगवान राम दरबार और भगवान वाल्मीकि जी की झांकियों ने भी श्रद्धालुओं में उत्साह पैदा किया।
विभिन्न स्थानों पर हुआ कलश यात्रा का स्वागत
जंगम शिवालय में टपकेश्वर के महंत श्री 108 कृष्णागिरी जी महाराज ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। वहीं पलटन बाजार में कालिका मंदिर समिति की ओर से प्रसाद वितरण किया गया। रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान पहुंचने पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ कलश यात्रा का समापन हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने प्रभु श्रीराम के भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।

विभिन्न स्थानों पर हुआ कलश यात्रा का स्वागत
जंगम शिवालय में टपकेश्वर के महंत श्री 108 कृष्णागिरी जी महाराज ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। वहीं पलटन बाजार में कालिका मंदिर समिति की ओर से प्रसाद वितरण किया गया। रेसकोर्स स्थित श्री गुरु नानक मैदान पहुंचने पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ कलश यात्रा का समापन हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने प्रभु श्रीराम के भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
1-1की ऐतिहासिक रामलीला को देहरादून में मिल रहा नया स्वरूप
श्री रामकृष्ण लीला समिति टिहरी 1952, देहरादून के अध्यक्ष अभिनव थापर ने कहा कि पुरानी टिहरी की वर्ष 1952 से चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला को टिहरी के जलमग्न होने के बाद देहरादून में पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया गया है। इसी प्रयास के तहत रामलीला को भव्य स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है, ताकि उत्तराखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ा जा सके।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित रामलीला को विभिन्न माध्यमों से 85 लाख से अधिक दर्शकों ने देखा था। इस वर्ष डिजिटल माध्यमों के जरिए इसे एक करोड़ से अधिक दर्शकों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल माध्यमों से होगा रामलीला का लाइव प्रसारण
इस वर्ष महोत्सव में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए Digital Live Telecast System के माध्यम से रामलीला मंचन का सीधा प्रसारण किया जाएगा। डिजिटल स्क्रीन और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक दर्शकों तक कार्यक्रम पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
महोत्सव में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले कलाकार अपनी लोक कला और संस्कृति की प्रस्तुतियां देंगे। गढ़वाल के ढोल-दमाऊं, जौनसार की रणसिंगा परंपरा और कुमाऊं के छोलिया नृत्य सहित पारंपरिक लोक कलाओं को मंच प्रदान किया जाएगा।

11 अक्टूबर को पंचतत्व बैंड का कॉन्सर्ट, 20 अक्टूबर को रावण दहन
महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में 11 अक्टूबर को शाम 6 बजे श्री गुरु नानक मैदान, रेसकोर्स में आयोजित होने वाला पंचतत्व बैंड का विशाल कॉन्सर्ट शामिल है। इसमें उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत को आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके अलावा भजन संध्या, पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम और भव्य मेले का आयोजन भी होगा। आयोजकों के अनुसार, 20 अक्टूबर को रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद और लंका के पारंपरिक पुतला दहन का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।



