नई दिल्ली: देश के स्कूली पाठ्यक्रम और शिक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए सोशल साइंस (सामाजिक विज्ञान) की एक नई किताब जारी की है। इस नई किताब में भारत के इतिहास के सबसे बड़े, चर्चित और संवेदनशील राजनीतिक घटनाक्रम यानी 1975 के आपातकाल (Emergency) को शामिल किया गया है।
अब देश के स्कूली बच्चे पहली बार इतनी कम उम्र (कक्षा 9वीं) में आपातकाल के काले अध्याय का पाठ विस्तार से पढ़ेंगे।
नई किताब का नाम: ‘Understanding Society: India and Beyond-Part 1’
NCERT द्वारा जारी की गई इस नई सोशल साइंस की पुस्तक का नाम ‘Understanding Society: India and Beyond-Part 1’ रखा गया है। इस किताब के जरिए कक्षा 9वीं के छात्रों को साल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के पीछे के कारणों, उसके प्रभावों और उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों के बारे में विस्तार से समझाया जाएगा।
पाठ्यक्रम में इस बदलाव के मुख्य बिंदु:
पहली बार 9वीं में एंट्री: इससे पहले आपातकाल से जुड़े अध्यायों को आमतौर पर उच्च कक्षाओं (जैसे 12वीं की राजनीति विज्ञान) में पढ़ाया जाता था, लेकिन अब इसे बुनियादी स्तर पर 9वीं कक्षा में ही शामिल कर दिया गया है।
संवेदनशील इतिहास की समझ: इस बदलाव का उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े राजनीतिक संकट और लोकतांत्रिक अधिकारों के महत्व से रूबरू कराना है।
नया दृष्टिकोण: किताब में भारत और उसके बाहर के समाजों को समझने के लिए एक नया नजरिया (India and Beyond) पेश किया गया है।
क्यों खास है आपातकाल (Emergency) का यह चैप्टर?
25 जून 1975 को देश में लगाया गया आपातकाल स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक ऐसा दौर था, जिसने देश की राजनीति, न्यायपालिका और आम नागरिकों के अधिकारों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूली बच्चों को इस घटनाक्रम के बारे में पढ़ाकर उन्हें भारतीय लोकतंत्र की मजबूती, संविधान के महत्व और नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया जा सकेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत हुआ बदलाव
NCERT द्वारा किया गया यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत स्कूली पाठ्यक्रमों को अपडेट और रीस्ट्रक्चर करने की कवायद का हिस्सा है। काउंसिल का फोकस इस बात पर है कि छात्र केवल किताबी ज्ञान न लें, बल्कि देश के वास्तविक इतिहास और सामाजिक-राजनीतिक उतार-चढ़ाव से भी अच्छी तरह वाकिफ हों।
कक्षा 9वीं की यह नई किताब शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में उपलब्ध करा दी जाएगी, जिससे छात्र अब भारतीय इतिहास के इस बेहद संवेदनशील चैप्टर को अपनी पढ़ाई का हिस्सा बना सकेंगे।