ऋषिकेश। देश के जाने-माने चिकित्सक और समाजसेवी डॉ. क्षेमेन्द्र गुप्ता का शनिवार, 1 अगस्त 2026 को शाम लगभग 5 बजे निधन हो गया। वे राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग (भारत सरकार) के डेंटल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड के पूर्णकालिक सदस्य और सुभारती विश्वविद्यालय (देहरादून) के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. हिमांशु एरन के पूज्य पिता थे।
रविवार को मुनि की रेती स्थित पूर्णानंद श्मशान घाट पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
जनस्वास्थ्य और समाजसेवा में उल्लेखनीय योगदान
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डॉ. क्षेमेन्द्र गुप्ता ने हल्दौर, बिजनौर और मेरठ क्षेत्र में लंबे समय तक चिकित्सा सेवा और समाजसेवा के क्षेत्र में मिसाल कायम की।
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स्वास्थ्य सेवा: उन्होंने मोतियाबिंद के उपचार, पोलियो उन्मूलन अभियान और जनस्वास्थ्य जागरूकता के लिए जीवनभर सराहनीय कार्य किए।
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शिक्षा का समर्थन: वे शिक्षा के प्रबल समर्थक थे और हल्दौर की कई शैक्षणिक संस्थाओं से निरंतर जुड़े रहे।
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मरणोपरांत नेत्रदान: मानव सेवा की इसी निष्ठा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने मरणोपरांत नेत्रदान किया, जिससे दो लोगों के जीवन में दृष्टि की नई उम्मीद जगी है।
सेवा और मानवीय मूल्यों से समृद्ध परिवार
परिवार के सदस्यों ने बताया कि डॉ. गुप्ता ने अपना पूरा जीवन निष्ठा, सेवा और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित रखा। उनकी यह विरासत परिवार में भी दृष्टिगोचर होती है—
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उनकी पुत्री डॉ. प्रीति विश्नोई भी नेत्र चिकित्सा और समाजसेवा में सक्रिय हैं तथा अब तक 10 हजार से अधिक निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन कर चुकी हैं।
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परिवार के अन्य सदस्य भी चिकित्सा, शिक्षा और सामाजिक विकास में लगातार अपना योगदान दे रहे हैं।
