देहरादून: रायपुर रोड स्थित आजाद नगर कॉलोनी एक बार फिर कथित तौर पर कब्रिस्तान की वक्फ भूमि पर अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर विवादों में है। आरोप है कि करीब 16 एकड़ जमीन को वर्ष 1876 में एक पठान/अफगान परिवार की ओर से कब्रिस्तान के लिए वक्फ को दान किया गया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि समय के साथ इस जमीन पर अतिक्रमण कर 100 से अधिक मकान और दुकानें बना दी गईं।
मामले में अब उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने सख्त रुख अपनाया है। बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की ओर से देहरादून के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के अधिकारियों को पत्र भेजकर कथित अवैध निर्माण को तत्काल रोकने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
1876 में कब्रिस्तान के लिए दान की गई थी जमीन का दावा
शिकायतकर्ता इस्लामुद्दीन अंसारी, निवासी डीएवी कॉलेज रोड, देहरादून ने 14 फरवरी 2023 को उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वक्फ संख्या-8, कब्रिस्तान अधोईवाला की भूमि पर बाहरी लोगों ने कथित तौर पर कब्जा कर मकान और दुकानें बना ली हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार, करीब 16 एकड़ जमीन वर्ष 1876 में कब्रिस्तान के उद्देश्य से वक्फ को दी गई थी। उनका दावा है कि इस भूमि पर पहले कब्रें और मजारें मौजूद थीं, लेकिन बाद में कथित अतिक्रमण के चलते वहां निर्माण कर दिया गया।
मकान-दुकानों से किराया वसूलने का भी आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि कथित कब्जाधारी इन भवनों को किराये पर देकर आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने शाहजहां और उनके भाई, निवासी बिजनौर, उत्तर प्रदेश, का नाम लेते हुए वक्फ संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की थी।
बताया गया है कि शिकायत के बाद तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी की ओर से अवैध निर्माण रुकवाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद निर्माण गतिविधियां जारी रहीं।
रायपुर रोड चौड़ीकरण के दौरान भी हटाए गए थे कब्जे
मामले से जुड़े पूर्व पत्राचार में तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी मुख्तार मोहसिन की ओर से रायपुर रोड चौड़ीकरण परियोजना का भी उल्लेख किया गया था।
देहरादून में सर्वे चौक से सहस्त्रधारा क्रॉसिंग तक रायपुर रोड के चौड़ीकरण के दौरान वक्फ संख्या-8 अधोईवाला कब्रिस्तान की 410.08 वर्ग मीटर भूमि लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित की गई थी।
बताया गया कि चौड़ीकरण के लिए संबंधित भूमि पर मौजूद कब्जों को हटाया गया और अवैध अतिक्रमणकारियों को नोटिस भी जारी किए गए। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद भी क्षेत्र में दोबारा बसावट और निर्माण का सिलसिला नहीं रुका।
खसरा नंबरों के साथ वक्फ बोर्ड ने भेजा पत्र
करीब तीन वर्ष बाद एक बार फिर कथित अवैध निर्माण की शिकायत सामने आने के बाद वक्फ बोर्ड ने मामले को गंभीरता से लिया है।
बोर्ड की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वक्फ संख्या-8, रायपुर रोड, देहरादून की खतौनी संख्या 01655 के अंतर्गत आने वाले खसरा नंबर 684, 685, 687, 688, 689, 690, 691, 692, 693, 694, 695, 696 ख और 697 ख में यदि कोई अवैध निर्माण किया जा रहा है तो उसे तत्काल रोका जाए और नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मंडलायुक्त से लेकर एसएसपी तक को भेजी गई जानकारी
वक्फ बोर्ड ने मामले की जानकारी मंडलायुक्त गढ़वाल, जिलाधिकारी देहरादून, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, उप जिलाधिकारी (सदर) और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के सचिव को भी भेजी है।
बोर्ड का कहना है कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में वक्फ संपत्ति पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे या निर्माण को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
1988 से कानूनी लड़ाई लड़ने का दावा
शिकायतकर्ता इस्लामुद्दीन अंसारी का कहना है कि वह इस जमीन को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए वर्ष 1988 से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
उनके मुताबिक, “यह जमीन 1876 में कब्रिस्तान के लिए ली गई थी। यहां बड़ी-बड़ी कब्रें और मजारें थीं, जिन्हें तोड़कर मकान बना दिए गए। मैं 1988 से इसे खाली कराने के लिए संघर्ष कर रहा हूं। हाईकोर्ट ने निर्माण पर रोक लगाई, लेकिन फिर भी निर्माण हो रहा है।”
अंसारी ने कहा कि देहरादून में कब्रिस्तानों की कमी होती जा रही है और ऐसे में कथित तौर पर कब्रिस्तान की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई है।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
अब वक्फ बोर्ड की ओर से जिलाधिकारी, एसएसपी और एमडीडीए समेत संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजे जाने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर नजरें टिक गई हैं। हालांकि, भूमि पर मौजूद निर्माण और कब्जों को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित राजस्व अभिलेखों, न्यायिक आदेशों और प्रशासनिक जांच के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
