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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर विवाद: भगवंत मान सरकार ने कैबिनेट में पास किया विरोध प्रस्ताव

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब की भगवंत मान सरकार और केंद्र सरकार के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है। पंजाब सरकार ने इस नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए कैबिनेट बैठक में सर्वसम्मति से एक विरोध प्रस्ताव पारित किया है।

कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव पारित, सीएम मान ने उठाए सवाल

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार की सहमति के बिना मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करना संवैधानिक नियमों और स्थापित परंपराओं का सीधा उल्लंघन है। मान ने केंद्र सरकार पर पंजाब के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए ₹9000 करोड़ के आरडीएफ फंड, बाढ़ राहत पैकेज और बीबीएमबी (BBMB) नियमों में बदलाव जैसे मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने मांग की कि इस नियुक्ति अधिसूचना को तुरंत रोका जाए और राज्य की राय का सम्मान किया जाए।

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी इसे संघीय ढांचे पर प्रहार बताते हुए कहा कि राज्य की राय लिए बिना लिया गया फैसला लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

क्या है पूरा विवाद?

  • 6 अगस्त 2026: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का स्थायी मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की।

  • राय की प्रक्रिया: कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय ने फाइल राज्य सरकार को भेजी थी। रिपोर्टों के अनुसार, 2 सितंबर तक पंजाब सरकार ने इस पर अपनी औपचारिक राय नहीं भेजी थी।

  • 5 सितंबर 2026: केंद्र सरकार ने औपचारिक अधिसूचना जारी कर जस्टिस मिश्रा को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिया।

क्या राज्य सरकार की मंजूरी अनिवार्य है? (कानूनी पक्ष)

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217(1) के तहत हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है। इस प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकार से भी विचार-विमर्श किया जाता है।

हालांकि, स्थापित संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार राज्य सरकार की राय बाध्यकारी (Binding) या वीटो पावर जैसी नहीं होती है। केंद्र सरकार का तर्क है कि राज्य से राय मांगी गई थी और चूंकि राय अनिवार्य या वीटो नहीं है, इसलिए प्रक्रिया को पूरा कर अधिसूचना जारी की गई।

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जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा का परिचय

  • जन्म व शिक्षा: 16 नवंबर 1968 को जन्मे जस्टिस मिश्रा ने दिल्ली विश्वविद्यालय (किरोड़ीमल कॉलेज व सीएलसी) से अर्थशास्त्र और एलएलबी की पढ़ाई की।

  • वकालत: 8 मई 1993 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हुए और दीवानी, संवैधानिक व सेवा मामलों में अभ्यास किया। 2013 में वरिष्ठ अधिवक्ता बने।

  • न्यायिक सफर: 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज बने और 1 फरवरी 2016 को स्थायी जज नियुक्त हुए।

  • पंजाब-हरियाणा HC: 21 जुलाई 2025 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट स्थानांतरित हुए। पूर्व मुख्य न्यायाधीश शील नागू की सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति के बाद, 1 जून 2026 से वह कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting CJ) के रूप में कार्यरत थे।

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